मेरे ब्लॉग 'धरोहर' पर ताजा प्रविष्टियाँ

LATEST:


विजेट आपके ब्लॉग पर
Showing posts with label गाँधी जी. Show all posts
Showing posts with label गाँधी जी. Show all posts

Sunday, September 4, 2011

गाँधी पहेली 26/27

अहिंसक आन्दोलनों और अनशन के इस वैश्विक दौर की सबसे बड़ी प्रेरणा गांधीजी ने उपवास के साथ एक सकारात्मक और आत्मशुद्धि के माध्यम के रूप में कई सफल प्रयोग किये थे. इस बार की गाँधी पहेली इसी से संबंधित है. गांधीजी के सर्वाधिक लंबे उपवासों में से एक आठ मई, 1933 से आरंभ 21 दिनों के उपवास का कारण क्या था ?

(i) हरिजन आंदोलन और आत्मशुद्धि, (ii) हिंदू-मुस्लिम एकता (iii) खिलाफत आंदोलन (iv) किसान आंदोलन 

पिछली पहेली में पूछे गए प्रश्न का उत्तर है - शहीद उधम सिंह  की अस्थियों को आजादी के बाद स्वदेश वापस मंगवाने में श्री साधू सिंह थिंड जी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 

उत्तर अगले रविवार सुबह 9:00 AM पर, नई पहेली के साथ.



Sunday, April 3, 2011

गाँधी पहेली - 9

पिछले अंक में पूछी गई पहेली का उत्तर है - गांधीजी ने ऑटोग्राफ बुक में स्वयं को ब्रिटिश टीम के अतिरिक्त खिलाडी के रूप में रेखांकित किया था. 

गाँधी पहेली श्रंखला का अगला प्रश्न है -

1982 में प्रदर्शित हुई फिल्म 'गाँधी' में महात्मा गाँधी की भूमिका किसने निभाई थी ?


(i) रिचर्ड एटनबरो, (ii) बेन किग्सले, (iii) रोशन सेठ, (iv) रजत कपूर.

उत्तर अगले रविवार सुबह 9:00 AM  पर. 

Sunday, March 6, 2011

गाँधी पहेली श्रृंखला 5


गांधीजी पर आधारित पहेली श्रृंखला में आपकी भागीदारी का धन्यवाद. पिछले अंक में पूछी गई पहेली का सही उत्तर है – ‘ गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ‘. 
यहाँ यह जानकारी  उल्लेखनीय है कि टैगोर जी द्वारा ब्रिटिश शासन को 'सर' की उपाधि लौटाने के बाद 'गुरुदेव' की उपमा भी गांधीजी ने ही दी थी. 

इस श्रृंखला का अगला प्रश्न है – चंपारण के नील किसानों की दुर्दशा की ओर 1917 में गांधीजी का ध्यान आकर्षित करते हुए उनसे इस कृषक संघर्ष का नेतृत्व करने का आग्रह किन्होंने किया था ?
(i)  अली इमाम, (ii) डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, (iii) राजकुमार शुक्ल, (iv) मौलाना अबुल कलाम आजाद
उत्तर अगले रविवार, सुबह 9:00 AM पर नए प्रश्न के साथ. 

Sunday, February 6, 2011

रविवारीय गाँधी पहेली (1)



पहेली श्रृंखला - गांधीजी को जानने के लिए.

हम लोगों के पास गांधीजी के विचारों से सहमत या असहमत होने के लिए अपने-अपने तर्क हैं, मगर दोनों ही स्थिति में जरुरी है कि हम गांधीजी को जानते कितना हैं !
यह पहेली श्रृंखला गांधीजी को जानने की दिशा में मेरी ओर से एक और छोटा सा प्रयास है. इसका कोई विशेष फॉर्मेट अभी  तय नहीं है. प्रश्न वैकल्पिक उत्तर या इनके बिना भी पूछे जायेंगे.
उत्तर आप कहीं से भी खोज कर लायें, मुझे कोई ऐतराज नहीं है, मेरा उद्देश्य तो मात्र इस बहाने गांधीजी के प्रति थोड़ी और जिज्ञासा जगाना ही है.
उत्तर समय पर दे दिए जाने का प्रयास करूँगा, मगर विजेताओं जैसी किसी पहल का अभी कोई स्वरुप तय नहीं किया है. श्रंखला के आगे बढ़ने और आपके सुझावों के साथ सुधार किये जाते रहेंगे. अभी तो सिर्फ इतना ही  कह सकता हूँ कि हर रविवार को सुबह 10 बजे तक एक पहेली आपका इंतजार करती  हुई मिलेगी.
तो आपका स्वागत है इस नई पहेली श्रंखला में.
इस पहेली श्रृंखला में पहला प्रश्न है कि  -

गाँधी परिवार के उन सदस्य का नाम क्या था, जिन्होंने एक बार जूनागढ़ के नवाब को बाएं हाथ से सलामी दी थी, और इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा था कि  - "दायाँ हाथ पहले ही पोरबंदर के लिए समर्पित हो चूका है. "

इस बार 4 विकल्प मौजूद हैं- (i) करमचंद गाँधी, (ii) मगनलाल गाँधी, (iii)लक्ष्मीदास गाँधी (iv) उत्तमचंद गाँधी. 
उत्तर अगले रविवार को नए प्रश्न के साथ. 

Friday, August 21, 2009

जिन्ना प्रशस्ति: और गांधीजी से चंद सवाल

(नोट- किसी भी पाठक की राष्ट्रवादी आस्था को ठेस पहंचने की स्थिति में अग्रिम खेद सहित)
गाँधी और नेहरु ने देश के बंटाधार में अपना कितना अमूल्य योगदान दिया है यह तो हमारे महान राष्ट्रवादी तत्त्व हमें 80 वर्षों से स्मरण कराते ही आ रहे हैं। ताजातरीन योगदान इनका स्वतंत्रता संग्राम में कायदे-आजम जिन्ना साहब की भूमिका को लेकर है। श्रद्धांजलि, पुण्य स्मरण जैसे व्यावहारिक कार्यक्रमों के आगे बढ़कर अब पुस्तक द्वारा आजादी के संघर्ष में जिन्ना साहब की महत्वपूर्ण भूमिका को विस्तार से स्पष्ट किया जा रहा है। इसी क्रम में संभवतः पहली बार देश विभाजन के परिप्रेक्ष्य में मूल 'लौह पुरुष' सरदार पटेल की भूमिका भी पुनर्परिभाषित की जा रही है। इस अभूतपूर्व वैचारिक दृष्टिकोण के प्रस्तुतीकरण के लिए देश इन महानात्माओं का सदा ऋणी रहेगा।
मगर इसी क्रम में कुछ सवाल भी इस नादान, अल्पज्ञानी दिल में उभरते हैं। वर्तमान युग में सामान्य से प्रश्न भी कुछ अतिसंवेदनशील आत्माओं की 'आस्था को आघात' पहुंचा देते है। ऐसे में मैं अपनी कुछ शंकाएं अपने आस - पास से लगने वाले बापू- गांधीजी से ही पूछने का साहस कर सकता हूँ
- बापू, क्या कारण है कि राष्ट्रवादी मुस्लिमों में इन राष्ट्रवादियों को जिन्ना जी ही याद आते हैं। मैं जिन्ना जी के बारे कुछ नहीं कहना चाहता, उन्हें जो लेना था उसे ले वो खशी ख़ुशी इस दुनिया से ही चले गए, मगर ऐसे राष्ट्रवादियों में कभी अमर शहीद ' अशफाकउल्ला खान ' का नाम नहीं सुनाई देता. 'मौलाना अबुल कलम आजाद' और 'जाकिर हुसैन साहब' के बारे कोई बात नहीं करता!
- काजी नजरुल इस्लाम और इकबाल साहब जैसे कवि और शायरों की किसी को याद नहीं आती !
- कहीं ऐसा तो नही कि कट्टर हिन्दू और कट्टर मुस्लिम विचारधारा में एक आनुवंशिक, अल्पज्ञात संबध हो और यही आनुवंशिक जीन का कभी-कभार उभर आना ही इस जिन्ना प्रेम का मूल कारण हो !
- क्या ऐसा नहीं था कि इसी अति हिन्दू और मुस्लिम राष्ट्रवादिता ने अंग्रेजों को हिंदुस्तान को दो भागों में बांटने का ठोस वैचारिक आधार दिया।
क्षमा चाहता हूँ बापू मगर बहुत ही बुझे दिल से यह शब्द इस्तेमाल करने पड़ रहे हैं कि अंग्रेजों की कूटनीति की नाजायज औलादें दोनों ही देशों में क्षद्म राष्ट्रवाद की आड़ में जनता को बरगला रही हैं। जनता को आज फिर तुम्हारी जरुरत है, मगर मुझमे तुम्हे फिर सूली पर चढ़ता देखने या किसी हत्यारी विचारधारा का शिकार होते देखने की हिम्मत नहीं है बापू.
अब तो बस इतना ही कहूँगा कि 'ईश्वर - अल्लाह' दोनों ही मुल्कों की जनता को अपने-अपने क्षद्म राष्ट्रवादियों को पहचानने और उनसे निपटने की शक्ति दें। आमीन.

तस्वीर : साभार गूगल
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...