अमेरिकी नागरिक अधिकारों के अप्रतिम योद्धा मार्टिन लूथर किंग II के पुत्र मार्टिन लूथर किंग III अपने पिता की भारत यात्रा की स्मृतियों को पुनर्जीवित करने के लिए भारत यात्रा पर रहे। अपने पिता की ही तरह वो भी गांधीजी के आदर्शों से प्रभावित रहे हैं और वैश्विक शांति की दिशा में अपने पिता के प्रयासों को आगे बढा रहे हैं. इस अवसर पर विविध आयोजनों में गांधीजी और उनके विचारों पर उनकी टिप्पणियों पर एक नजर डालना समीचिन रहेगा. उन्होंने पुनः यह दोहराया कि किंग II ने युद्ध और सैन्यवाद के विरुद्ध जो अभियान चलाया था उसकी प्रेरणा के स्रोत महात्मा गाँधी ही थे।
उनकी राय में अगर मानवता को बचाना है तो किंग के प्रेम और गांधीजी के सत्याग्रह को अपनाना ही होगा। वर्तमान में जारी हिंसा का हल न सिर्फ प्रतिहिंसा बल्कि शांतिपूर्ण तरीके से भी हो सकता है. गांधीजी कि तरह वो भी सहमत हैं कि अहिंसा हर धर्म, काल और देश में मौजूद है, अलबत्ता हर देश के अपने गाँधी और किंग होंगे जो वहां कि वस्तुस्थिति के अनुरूप काम करेंगे.
अश्वेतों के संघर्ष में अहिंसा के प्रयोग के लाभ बताते हुए उन्होंने कहा कि इससे उन्हें श्वेत नागरिकों का दिल जितने और समर्थन का आधार व्यापक बनाने में काफी मदद मिली। जिसका परिणाम द. अफ्रीका में रंगभेद के अंत और अमेरिका में ओबामा की जीत के रूप में भी सामने आया.
गाँधीजी जैसी हस्ती विश्व को सौंपने वाले भारत का आभार प्रकट करते हुए उन्होंने गांधीजी की अमेरिका सहित पुरे विश्व को दी प्रेरणा के लिए कृतज्ञता भी जताई।
उन्होंने कही कि इस ग्रह को और बेहतर बनाने के लिए जरुरी है कि गांधीजी के दर्शन को आत्मसात किया जाये। इस अवसर पर अपने पिता को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने कई देशों की यात्रा एक पर्यटक की तरह की मगर भारत वो एक तीर्थयात्री की तरह आये. आज हम भी और दृढ़प्रतिज्ञ और समर्पण के साथ प्रेम और अहिंसा की भावना लेकर जा रहे हैं अपने देश और सारे विश्व के लिए.
गांधीजी के विचारों के प्रति दुनिया के सर्वशक्तिशाली राष्ट्र के शिखरपुरुषों के ये विचार हमें भी गाँधी विचार के पुनर्मूल्यांकन को प्रेरित करते हैं.

